सामान ज़रूरी ही लिया है

सोच कर निकला था घर से
कि सामान ज़रूरी ही लिया है
ज़ितना बन पड़ा मुझसे
बस उतना अपनी खातिर किया है *

कुछ ही दूरी पर देखा उसने समंदर
दिमाग गोते खाता रहा अंदर ही अंदर
एक पल में घुम गया वो बिता हुआ कल
काफी देर तक मची रही हलचल *

आगे बैठा जाकर पेड़ के सहारे
अब जाकर नजर आये सुबह को तारे
यूँ सोचा के कुछ अपनी खातिर किया होता
कभी कुछ पल अपने लिए भी जी लिया होता *

टकटकी लगाये असमान को
कुछ इस तरह निहार रहा था
कुछ खो रहा था खुद में
कुछ खुद को पुकार रहा था *

अक्समात ही टूटी तन्हायी
और अपना सामान नजर आया
अब वो बाहर गोते से इस कदर आया *

के अभी करना है अपनों के लिए बहुत कुछ
इसलिये सामान ज़रूरी ही लिया है
ज़ितना बन पड़ा मुझसे
बस उतना अपनी खातिर किया है **

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गुमान

इतना गुमान नहीं करते किसी बात पर ,
वक़्त की साजिशों का पता नहीं होता ..

कैसे बोल देते हैं मीठे बनकर जालिम बातें
कुछ लोगों का कभी भरोसा नहीं होता ..

कर्मों का हिसाब भी कोई चीज है जनाब ,
जो करते हो लौट कर आता ही है ..

नहीं यकीन तो आजमा कर देख लो
गुमान कर के बन्दा पछताता ही है ..!!

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ये कोशिशें !✍️

मुझे उलझाने की कोशिश न कर ए-ज़िन्दगी
मैं संघर्षों के बीच भी कोशिशों को न भूला
तेरे हर वार को सीने पर लपेट कर
अपनी कोशिशों से बनाया खुशियों का झूला ,

बीते वक़्त की कहानी तुम्हे है पता ए-ज़िन्दगी
मैने रहने न दी कोशिशों में कमी
तू जो इस तरह पेश आयेगी
मेरी हिम्मत तो न मुझसे चुरा पायेगी ,

जायज़ है मैं थक जाऊँ संघर्षों के बीच
पर इस थकान को मेरी कमजोरी न समझना
छांव के बीच धूप चाहे देती रहना
पर ए-ज़िन्दगी मेरी हिम्मत से न ऊलझना !!

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मुफत के सलाहकार😀

मुफत के सलाहकार मिलते हैं
उनको क्या मुंह लगाना ,
बात बात में बात हुई बस
आगे बोल कर क्यू पछताना ..

अगर होते हम उनके दिल के करीब
ज़रा मुंह बनाकर पूछ लेते ,
बई यही काम है तेरा ?
य़ा बस दूजे के घर का राज पता लगाना ?

अरे बई – सलाह देने को ही रखी है
य़ा खुद भी अमल किसी सलाह पर ,
जब खुद का घर ना संभले
तो क्यू आह बोलना किसी के घाव पर ..

खुद पर बीतेगी तो पुछुंगी मैं
क्यू बई मुझे दी हुई सलाह याद है ?
कल तू सलाहकार था ,घर तेरा आबाद था
देख आज मैं सलाहकार हूँ, घर मेरा आबाद है ..

कडवे सच को जान कर भी
मुफत के सलाहकार बाज नहीं आते ,
खुद पर भी बीत जाये जब
तो भी ये रास नहीं आते ..

भला इसी में कि बात बात में बात हो
और रस्ता काट लो ,
हंसी ख़ुशी के लम्हे जी लो
गम के लमहे छांट लो ..

इन मुफत के सलाहकारों को हाथ जोड प्रणाम है
अनोखा है इनका ग्य़ान भी ,
उतार चढ़ाव की ज़िन्दगी में
इनका बोलबाला तो सरेआम है !!

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👩🙍🙇😍

बड़े करीब से देखा है
उन नैनों में बिखरे ख्वाब कई

बड़े गौर से निहारा है
उन होंठों से उठते सवाल कई

पैदाइशी शिकन है माथे पर
य़ा बनावट ललाट की ऐसी

क्या कहूँ कैसे ऊलझी गुत्थी
बस ना सुलझने वाली जैसी

बहुत स्नेह मुझ पर लूटाया तुमने
गलत सही का फर्क बताया तुमने

अपनी हर इच्छा ताक पर रख कर
अपना हर वचन भी निभाया तुमने

ज़रा बताओ नैनों में बिखरे क्यू ख्वाब हैं
ज़रा बताओ माथे पर शिकन की लकीरें क्यू बेहीसाब हैं

छोड़ो ना अब ऊलझनों में रहना
कुछ मन में हो भी तो मुझसे कहना

मेरी हंसी तूमसे मेरी ख़ुशी तुमसे
मैं दुआ में अपने हिस्से के सुख भी तुमको देती हूँ

मैं आज भी तुम्हारी आंखों का तारा पापा
मैं आज भी तुम्हारे घर की बेटी हूँ
मैं आज भी तुम्हारे घर की बेटी हूँ !!

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चलो ना..एक बार फिर !!

चलो कुछ कर गुजरें फिर से
चलो कुछ लम्हों को जी लें फिर से

कुछ नयी ऊमंग सी भर लें
कुछ अपनी हसरतें पूरी कर लें

चलो ना आसमान पर आशिया बनायें
चलो ना कुछ अलग सा कर दिखायें

तुम चलो मेरे कदम से कदम मिलाकर
चलो ना हाथ में हाथ लेकर

चलो ना हर पल में ज़िन्दगी जी जायें
चलो ना फिर से अधूरे ख्वाब सजायें

चलो ना …फिर से एक बार..
उसी दिन से,उसी जगह से
एक बार फिर रिश्ते में ज़ुड जायें !!

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क्यूँ ??

टेक कर घूटने तू बैठा क्यूँ है !
बुझा सा इस तरह रहता क्यूँ है
ज़रा मस्त रह अपने दर्द के साथ
कोई दर्द है भी तो कहता क्यूँ है ..

आंधियों से लड़कर ही तो पार जायेगा
वक़्त का खेल सारा ये वक़्त भी गुजर जायेगा
मस्तमोला है रूह तेरी मस्ती में तू झूमता रह
तूफान आयेगा और आकर चला जायेगा ..

बारिश को आने दे बूंदें बनकर
दर्द को ज़रा इसमें घूलने सा दे
जब दर्द ही बेदर्द है तो सहता क्यूँ है
टेक कर घूटने तू बैठा क्यूँ है !!

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