कर होंसला फिर से**

चल कर होंसला फिर से
एक नयी ऊड़ान भरने को
अब अगर होंसला संग है
तो नहीं बाकी कुछ डरने को
चल कर होंसला फिर से ..*

नहीं कोई पीठ थपथपाने वाला ना सही
तू अपना मार्ग चलता जा
ना दे आड़े आने कोई बाधा
बस अपना शत प्रतिशत देता जा
चल कर होंसला फिर से ..**

हार कभी तो जीत में बदलेगी
कभी तो होगा ऊजाला अंधियारे से
कोई मंजर तो मिल जायेगा
वरना कुछ ना होगा मन हारे से
चल कर होंसला फिर से ..***

चल कर होंसला फिर से
एक नयी ऊड़ान भरने को !!

Pic credit : google baba

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ना आया कर 😉

आजाद कर मुझे झूठे ख्वाब से
के मुझे जीने की फिर से चाह है ..*
ना आया कर झूठी तस्सली देने
अब तो दिल खुद ही बेपरवाह है ..
ये जो तुम मेरा तकिया भीगोते हो
एक आंसू की बूंद बनकर ,
मैं खड़ी हूँ अब से
तुम्हारे सामने सीना तनकर ..
ना आया कर अब दिलासा देने
के तेरा अब से आना मनाह है ..
आजाद कर मुझे झूठे ख्वाब से
के मुझे जीने की फिर से चाह है ..
ना आया कर झूठी तस्सली देने
अब तो दिल खुद ही बेपरवाह है ..**

Pic credit : Google

ये सच है !

ये सच है
मेरा यूँ ही परेशान हो जाना
ये सच है
मेरा यूँ ही ज़िद् पर अड़ जाना
ये सच ही तो है
दर्द को हंसी में उड़ाया कई बार
ये सच ही तो है
बेमतलब सर को झुकाया कई बार
हाँ ये भी सच है
मैने खुद को तलाशा है
हाँ ये भी सच है
मैने रूह को निखारा है
ये सच है
मैं कमज़ोर हूँ अभी के लिए
पर ये सच ही तो है
मैने खुद को हर परिस्थिती में संभाला है ..!

कुछ भी ज़्यादा देर नहीं ठहरता ..*

चाहे गम हो खजाने में
य़ा हो खुशियों की ड़िबिया
पर कुछ भी ज़्यादा देर नहीं ठहरता ..

संघर्ष बढ़ जाता है समय के साथ
य़ा निषकर्श पर पहुँचते हैं
पर कुछ भी ज़्यादा देर नहीं ठहरता ..

वक़्त की साजिश से ना कोई वाकिफ
ना दाव लगाना आसान है ,
सब खेल घड़ी की सूईयों का
हर सैकंड बदलता है ,
हाँ !!
पर कुछ भी ज़्यादा देर नहीं ठहरता ..*****

Image credit: Google

मंजिल मिलेगी ज़रूर

कदम बढ़ रहे हैं धीरे धीरे
मैं सफर में हूँ और मंजिल अभी दूर ,
चुनौतियां स्वीकार हैं मुझे
आज नहीं तो कल
सुहानी मंजिल मिलेगी ज़रूर ..☺️&!!


Pic credit: google

क्या अर्थ ?

आदत से मजबूर हो ,
य़ा मानसिक रुप से बीमार?
किसी सोच में ड़ूबे हो ,
य़ा लटकायी किसी ने सर पर तलवार?
ये क्या नया नाटक है
इस तरह मेहमाननवाजी का ,
मीठी जुबान और पीठ पीछे वार ,
क्या अर्थ इस ड्रामेबाज़ी का ?
जो हो जैसे हो वैसे ही दिखलाओ ना
क्यूँ अच्छे ज़ग्ग पीछे
यूँ झूठी तस्वीर बनाओ ना,
ये जो रुप लिए फिरते हो
क्यूँ और किसलिये ?
ज़रा मुझको तो समझाओ ना ..!!

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कुछ कर गुजरने की तम्मना

कुछ कर गुजरने की तम्मना
दिन और रात रहती है ..*
रातों को सोने नहीं देती
दिन में चैन नहीं आता ,
दिल और दिमाग मे
बस एक ही बात रहती है ,
कुछ कर गुजरने की तम्मना
दिन और रात रहती है ..**

तुम आलम ना ही पूछो
मेरे ख्वाबों के आसमान का,
तुम अन्दाजा भी ना लगा पाओगे
मेरे अलग से बनाये जहान का ,
वो जो तलब सी है अंदर एक
तुम क्या जानो कितना बेताब रहती है ,
कुछ कर गुजरने की तम्मना
दिन और रात रहती है ..***

दिल और दिमाग मे
बस एक ही बात रहती है ,
कुछ कर गुजरने की तम्मना
दिन और रात रहती है ..****!!✌️

Pic courtesy: Google