सुलगती चिंगारी

सुलगती सी जो चिंगारी है
बस यही मुझ पर भारी है ..
ना खबर तुम्हारे आने की
ना मेरी अपनी तैयारी है ..

पर कोशिश हम दोनो की है
और मेहनत रंग लाना ज़रूरी है ..
वो जो सूनापन खलता है
बिन जिसके ज़िन्दगी अधूरी है ..

उल्टी सीधी जैसी भी निभी
अब मेरी तुम्हारी यारी है ..
पर ..
सुलगती सी जो चिंगारी है
बस यही मुझ पर भारी है ..
ना खबर तुम्हारे आने की
ना मेरी अपनी तैयारी है ..!!

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फिर सिहर उठा मन..

मद्धम सी रोशनी
तीव्र हुई धड़कन
संभाले ना संभला
फिर सिहर उठा मन !

पग -पग जैसे कांटे बिछे
कुछ अलग ही बिरहा दिखे
इसी बिरहा की हुई जैसे जलन
संभाले ना संभला
फिर सिहर उठा मन !

रात्रि का एक पहर
कुछ ढा जाता है कहर
सुबह की हो रोशनी
य़ा तपती हो दोपहर
ये कैसी लगी है अगन
संभाले ना संभला
फिर सिहर उठा मन !

किस बोझ का जंजाल ये
कैसा मेरा हाल ये
उलझता ही जा रहा
जीवन का सवाल ये
ये किस दिशा वायु का चलन
संभाले ना संभला
फिर सिहर उठा मन !

हो कुछ ऐसा अगर
कोई जादू की परी आये
य़ा कुछ हो ऐसा अगर
किसी की दुआ ही लग जाये
कुछ कर्मो खुदा हो
ताकत जो आ जाये बन
संभाले संभल जाये
फिर ना सिहर उठे मन !
संभाले संभल जाये
फिर ना सिहर उठे मन !!

Pic credit : Google

आखिर है तो है क्या ?

ख्वाहिशों के सिलसिलों में
एक ख्वाहिश का ज़िन्दा रहना ,
हकीकत है य़ा अफसाना
आखिर है तो है क्या ?

मर -मर के ज़िन्दा रहना
य़ा ज़िन्दा रहके भी बिखर जाना ,
है यही ज़िन्दगी य़ा है कोई तराना
आखिर है तो है क्या ??

दूर सागर में छोटा सा किनारा
जैसे ख्वाहिश का हकीकत बन जाना ,
जैसे डूबते को तिनके का सहारा
ये अनूठी कहानी य़ा सार कोई ,
आखिर है तो है क्या ???

एे मन ! जब सुलझे पहेली कोई
एक नयी ख्वाहिश बन जाये सहेली कोई ,
ख्वाहिशों के ढेर में से चुन कर
फिर एक नयी ज़िद्ध पे अड़ जाना ,
आखिर है तो है क्या ???
आखिर है तो है क्या ???

Pic credit: Google

छोटी सी है ये ज़िन्दगी …..

छोटी सी है ये ज़िन्दगी
तुम इसे खुल कर ज़ियो !
कभी कभार कडवे घूंट पीने पड़ते हैं
इस गम को भी तुम हंस कर पीयो ..
गर मैं तुम्हारी प्रेरना हूँ
तो तुम भी मेरी हिम्मत हो ..
बड़े नसीब से मिले हो मुझको
जाने कितने कर्मों की दौलत हो ..

गम आयेंगे गम जायेंगे
तुम मेरी हिम्मत बने रहना ..
जब मैं कभी कमज़ोर पड़ू
तुम साथ मेरे खड़े रहना ..
मुशकिल राहें बड़ी मिलती हैं
तुमहे इसको आसान बनाना है ..
मैं पास हूँ और साथ भी
तुमहे अभी ज़िन्दगी में मुकाम पाना है ..

हिम्मत का बांधे रखो कफ़न सर पर
बाकी गम आधा -आधा कर लियो ..
छोटी सी है ये ज़िन्दगी
तुम इसे खुल कर ज़ियो !!
कभी कभार कडवे घूंट पीने पड़ते हैं
इस गम को भी तुम हंस कर पीयो ..
छोटी सी है ये ज़िन्दगी
तुम इसे खुल कर ज़ियो !!!

Pic credit: GOOGLE

दिनचर्या का हिस्सा

ठंडी-ठंडी हवा और मिट्टी की सोंधी खुशबू
उपर से तेरे कदमों की आहट
और मेरा खिडकी से झांकना ..

तुम्हारा दहलीज पर दस्तक देना
और मेरा भाग कर चले आना ..

खामोश रह कर बहुत कुछ कह जाना
और कहते हूए खामोश होना ..

अब कुछ इस तरह दिनचर्या का हिस्सा है
मानो तो खूबसुरत एहसास
ना मानो तो अनसूना किस्सा है ..

जगह तुम्हारी ही खाली है ..

वो जो बालकोनी में सूनापन है ना
वो जो घर के कोने खाली से हैं ना
उनमें जगह तुम्हारी ही खाली है ..
वो जो बीच की दूरियां सी हैं ना
वो जो थोडी बहुत मजबूरियां सी हैं ना
उनमें याद तुम्हारी ही संभाली है ..

तुम नहीं हो तो
मैं कैसे तुमहे महसूस करती हूँ
तुम्हारी हथेलियों को ले अपनी हथेलियों में
बिलकुल तुम्हारी तरह तुमही से ड़रती हूँ ..
ऐसा क्या है कि तुम हो
फिर भी तुम नहीं हो ..
मुझे महसूस भी होता है
और एहसास भी अच्छे से
के तुम हो भी नहीं
फिर भी यहीं कहीं हो ..

कुछ ने कहा क्या पागलपन है
कुछ तो ये भी समझे
के मैने आपबीती लिखी ..
ये कारवा ज्जबातों का है जनाब
फिर कहानी मेरी रही
य़ा किसी और की दिखी ..

वो जो बाहों को देने वाला सहारा है ना
वो जो घर के आंगन की दहलीज है ना
उनमें जगह तुम्हारी ही खाली है ..
वो जो छोटी छोटी बातें हैं ना
वो जो बिन सोये कट जाती रातें हैं ना
उनमें याद तुम्हारी ही संभाली है ..

यूँ महसूस करवा कर खालीपन दे जाना
ये तो अच्छा नहीं होता
जब आओ तो वक्त लेकर आओ
वादा कर के फिर ना निभाना
ये तो अच्छा नहीं होता ..

वो जो य़ादों की ऐल्बम हैं ना
जो हमारी तस्वीर और अच्छी बनाती है
उनमें जगह तुम्हारी ही खाली है ..
वो जो मनाये जाने वाले त्योहार हैं ना
ज़िनमें रोनक की वजह तुम रहते हो
उनमें याद तुम्हारी ही संभाली है ..

वो जो बालकोनी में सूनापन है ना
वो जो घर के कोने खाली से हैं ना
उनमें जगह तुम्हारी ही खाली है ..
वो जो बीच की दूरियां सी हैं ना
वो जो थोडी बहुत मजबूरियां सी हैं ना
उनमें याद तुम्हारी ही संभाली है ..
😊😊

माओं से जन्नत हैं घर

जिन माओं से जन्नत हैं घर
उन माओं को सलामत रखना खुदा ..

जिन माओं से जन्मी ज़िन्दगियां
उन माओं को लम्बी उम्र देना सदा ..!

बचपन में जो ऊंगली पकड़ चलना सिखाती
वो भी एक रुप “माँ ” का ..

लड़ते झगड़ते जब बीतता बचपन
जो रिश्ते में “बहन ” कहलाये
वो भी एक रुप “माँ ” का ..

बड़े प्यार से जो घर आंगन संभालती
जो रिश्ते में पत्नी /बहु कहलाये
वो भी एक रुप “माँ ” का ..

कितने नाजों से ज़िसे हो पालते
जो रिश्ते में “बेटी ” कहलाये
वो भी एक रुप “माँ ” का ..

कितने रूपों में है “लक्ष्मी ” आयी
हर लक्ष्मी को “लक्ष्मी माँ ” का नाम दिया एे खुदा ..

जिन माओं से जन्नत है घर
उन माओं को सलामत रखना सदा ..

ना रहे मोहताज कोई माँ एक दिन के सम्मान की
सम्मान मिले और हर दिन हर पल का मिले
हर दीवार मिट जाये एे खुदा अब अग्यान की ..

दर्द में भी मुस्कुराना होती है ज़िसकी अदा
उन माओं को सलामत रखना एे खुदा ..

जिन माओं से जन्नत हैं घर
उन माओं को सलामत रखना खुदा ..

जिन माओं से जन्मी हैं ज़िन्दगियां
उन माओं को लम्बी उम्र देना सदा …..!!!

Pic credit : Google