आखिर है तो है क्या ?

ख्वाहिशों के सिलसिलों में
एक ख्वाहिश का ज़िन्दा रहना ,
हकीकत है य़ा अफसाना
आखिर है तो है क्या ?

मर -मर के ज़िन्दा रहना
य़ा ज़िन्दा रहके भी बिखर जाना ,
है यही ज़िन्दगी य़ा है कोई तराना
आखिर है तो है क्या ??

दूर सागर में छोटा सा किनारा
जैसे ख्वाहिश का हकीकत बन जाना ,
जैसे डूबते को तिनके का सहारा
ये अनूठी कहानी य़ा सार कोई ,
आखिर है तो है क्या ???

एे मन ! जब सुलझे पहेली कोई
एक नयी ख्वाहिश बन जाये सहेली कोई ,
ख्वाहिशों के ढेर में से चुन कर
फिर एक नयी ज़िद्ध पे अड़ जाना ,
आखिर है तो है क्या ???
आखिर है तो है क्या ???

Pic credit: Google

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13 thoughts on “आखिर है तो है क्या ?”

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