कांटे भी ज़रूरी**

हादसों से बच कर कहाँ जायें
यूँ कांटे भी ज़रूरी हैं फूलों में मगर ,
खुशियों का नजारा नही आता
तकलीफ ना काटी हो अगर *

मुसाफिर हूँ चलते रहने में भला
ज़िन्दगी का सफर एक जैसा कब चला ,
कभी कम तो कभी ज़्यादा रहा असर
यूँ कांटे भी ज़रूरी हैं फूलों में मगर **

गर ठहर जाऊँ ना गुजारा ना ठिकाना
कब तक चलेगा ये हादसों का बहाना ,
अब हर मुसाफिर की जैसे तीखी सी नजर
यूँ कांटे भी ज़रूरी हैं फूलों में मगर ***

उठ के चलना और बढ़ जाना ही रास्ता
कांटों से निकल फूलों का लेकर वास्ता
बस इसी तरह कट जाता है जीवन रूपी सफर
यूँ कांटे भी ज़रूरी हैं फूलों में मगर ****!!

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तू  हिस्सा था*

तू हिस्सा था मेरी काया का
पर सच ये था कि साया था
तू मोह जंजाल में ऊलझा
कुछ माह का भ्रम फैलाया था *

जो ‘स्पर्श’ दोनों में था
उसे तुम और मैं ही जानते हैं
किसी बुरे कर्म का लेखा होगा
ऐसा सब ही मानते हैं *

रूह को खाली कर गयी ‘दृष्टि’
तेरे बिन बेजान सी सृष्टी
शायद कुछ अनुभव बताने आया था
तू हिस्सा था मेरी काया का *

तू हिस्सा था मेरी काया का
पर सच ये था कि साया था
तू मोह जंजाल में ऊलझा
कुछ माह का भ्रम फैलाया था **

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सर्कस जैसा खेल *

जीवन रूपी रंगमंच का
सर्कस जैसा खेल ..
जोकर जैसी हालत यहां
कुछ हंसी ख़ुशी का मेल ..*

इस सर्कस में खेल निराले
कुछ जोकर का भी अहम रोल ..
अंत सबका निश्चित है
नहीं इसका कोई भी तोड़ ..*

सर्कस के इस खेल में
रंग दिखाने को आतुर हर खिलाड़ी ..
कभी वो आगे कभी ये आगे
कभी तेरी बारी कभी मेरी बारी ..*

पथ पाना है तो जोकर बन जाओ
गम छुपाकर हँसाते रहो ..
ना ऊलझो ना समझो इसको
जीवन रूपी रंगमंच में
जोकर बनकर सर्कस दिखाते रहो ..*

माना के कठिन डगर है
पर सर्कस में मजा बड़ा है ..
जोकर बन जाना अासान नहीं
पर हंसाने में नशा बड़ा है ..*

जीवन रूपी रंगमंच का
सर्कस जैसा खेल ..
जोकर जैसी हालत यहां
कुछ हंसी ख़ुशी का मेल ..**

Pic courtesy : Google

पर …?????

यूँ नहीं ऊड़ाया जाता उदासी को धुअें में
कि मुशकिल होती है राह कुछ खोने के बाद ..
यूँ नहीं भूला जाता दर्द कुछ पलों में
कि मुशकिल होती है राह कुछ खोने के बाद ..!

पर …

राह आसान कब रही जीवन की
उतना अच्छा ज़ितना हंसते कट जाये सफर ..
चुनोतियों का दौर तो बना रहता है
उतना अच्छा ज़ितना दिल पर हो कम असर ..!!

कोशिश हमेशा रही..

कोशिश हमेशा रही समझदारी निभाने की
सच कहे तो खुशियां बेवकूफी करने से मिली ..
कोशिश हमेशा रही खामोशी से सब्र की
सच कहें तो खुशियां अशांत रहकर मिली ..

ज़िन्दा तो हम बचपने से थे
जो गुजर गया एक उम्र आते आते ..
एक तलब ही रही अब घिस – घिस के चलने की
अब ये आदत जायेगी जाते जाते ..

कोशिश हमेशा रही गलतियों से सिखने की
सच कहें तो खुशियां गलतियां करने में मिली ..
कोशिश हमेशा रही सच और सच्चेपन की
सच कहें तो खुशियां झूठेपन में मिली ..

ये जो फर्क है हलकी सी लकीर का
जो नामुमकिन को मुमकिन बनाता है ..
हर किसी के बस की बात कहाँ
हर कोई इसे नहीं समझ पाता है ..

कोशिश हमेशा रही ये फर्क समझने की
सच कहें तो खुशियां अंजान रहने से मिली ..
कोशिश हमेशा रही नर्म दिल रखने की
सच कहें तो खुशियां बेरहम होकर मिली ..!!

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मेरा पत्थर दिल

अब तू देख ज़रा मेरा पत्थर दिल *
मजाल है मैं उफ़ भी कर ज़ाऊँ..
तू दे कितनी चुनोतियाँ मुझे
मजाल है मैं अब डर ज़ाऊँ..

तेरी मर्जी तू जाने
पर मेरा ईरादा तू जान ले..
ना मैं बिखरूँ ,ना मैं हारूँ
अब तू मुझे पहचान ले..
सांस पहली हो य़ा आखिरी
अब ना उम्मीद ना मुशकिल
अब तू देख ज़रा मेरा पत्थर दिल **

अब तू देख ज़रा मेरा पत्थर दिल ***
मजाल है मैं उफ़ भी कर ज़ाऊँ..
तू दे कितनी चुनोतियाँ मुझे
मजाल हैं मैं अब डर ज़ाऊँ..!!


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कढ़ा इम्मतिहान

अच्छा ! इम्मतिहान इस बार कढ़ा है ,
तो क्या ? वफा – एे ज़िन्दगी हौंसला बड़ा है !
ज़रा सा डोल ज़रूर गए
पर ! अद्वित्यिय ईश्वर साथ खड़ा है !

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